सुष्मिता सेन की वेब सीरीज 'ताली' हाल ही जियो सिनेमा पर रिलीज हुई। इसमें ट्रांसजेंडर गौरी सावंत बनीं सुष्मिता की जितनी तारीफ हो रही है, उतनी ही उनके बचपन गणेश का किरदार निभाने वालीं एक्ट्रेस कृतिका देव की। कृतिका देव मिल रहे रिस्पॉन्स से बेहद खुश हैं। लेकिन 'ताली' की शूटिंग के दौरान उन्हें किस मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा, यह कृतिका ने एक इंटरव्यू में बताया है। साथ ही खुलासा किया है कि 'ताली' के एक सीन शूट के दौरान एक आदमी ने उन्हें भिखारिन समझ लिया था और 10 रुपये भी दिए थे।
मालूम हो कि Taali ट्रांसजेंडर और सोशल एक्टिविस्ट श्रीगौरी सावंत की जिंदगी पर आधारित है। वह सेक्स वर्करों के लिए भी काम करती हैं। इसमें उनके द्वारा झेली गई कठिनाइओं के साथ-साथ गणेश से गौरी बनने के दर्दभरे सफर को दिखाया गया है। 'ताली' में जहां गणेश का रोल Krutika Deo ने निभाया, वहीं Sushmita Sen ने श्रीगौरी सावंत का।
कृतिका देव ने बताया 'ताली' का मुश्किल सीन
कृतिका देव ने 'हिंदुस्तान टाइम्स' से बातचीत में बताया कि उनके लिए 'ताली' का सबसे मुश्किल सीन वह रहा था, जब गणेश को मुंबई की सड़कों पर भीख मांगने के लिए मजबूर किया जाता है। उसी सीन को याद कर कृतिका बोलीं, 'हमने रियल लोकेशन पर हिडन कैमरों के साथ शूटिंग की थी। यह एक तरह का गोरिल्ला शूट था। सड़क पर मैं अकेली खड़ी थी। जैसे ही ट्रैफिक सिग्नल लाल होता, मैं भीख मांगने सड़क पर पहुंच जाती। एक आदमी ने मुझे 10 रुपये दिए और आशीर्वाद दिया।'
शख्स ने समझा भिखारिन, दिए 10 रुपये
कृतिका ने आगे बताया, 'उस घटना को याद कर अभी भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसे सच में लगा कि मैं भीख मांग रही थी। यह मेरी एक्टिंग के लिए एक तरह से कॉम्प्लिमेंट था, पर वो जो फीलिंग थी, बहुत अजीब थी। हमारे डीओपी राघव सर ने कहा कि मैं वो 10 रुपये का नोट फ्रेम करवाकर रख लूं। मैंने अभी फ्रेम नहीं करवाया है, लेकिन वो नोट अभी भी मेरे पास है। फिर मुझे एहसास हुआ कि गौरी सावंत और न जाने उनके जैसी कितनी हैं, जिन्हें इस परिस्थिति से आज भी गुजरना पड़ता है। मुझे उसे स्वीकार करने में बहुत मुश्किल हुई।'
इस सीन में इमोशनल हो गई थीं कृतिका देव
कृतिका देसाई ने बताया कि जिन सीन्स में गणेश घर छोड़ देता है और फिर सेक्सॉलजिस्ट से जानकर मिलता है, वो भी काफी इमोशनल थे। वह बोलीं, 'किसी 15-16 साल के बच्चे को फैसला लेना बहुत मुश्किल होता है। मैंने वो इंटरव्यू सुने, जिनमें गौरी सावंत ने बताया कि जब उन्होंने घर छोड़ा तो जेब में सिर्फ 50 रुपये थे। नंदू माधव सर को धन्यवाद कि मैं उस सीन को अच्छे से करने में कामयाब रही। फिर कुछ जादुई हुआ। जैसे ही टेक खत्म हुआ, हमने एक-दूसरे को आंसू भरी आंखों से देखा और शुक्रिया अदा किया। मुझे उनका सपोर्ट मिला। एक-दूसरे को देखा और एक-दूसरे को धन्यवाद दिया। मुझे उनसे समर्थन मिला और उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें मेरे द्वारा किये गए आंदोलन से कुछ प्रेरणा भी मिली। ताली एक बहुत ही संतोषजनक अनुभव रहा है।'